Apna Khata (ई-धरती) राजस्थान के राजस्व मण्डल का आधिकारिक भूमि-रिकॉर्ड पोर्टल है, जो apnakhata.rajasthan.gov.in पर उपलब्ध है। यहाँ आप बिना लॉगिन किए जमाबंदी नकल, खसरा, खतौनी, भू-नक्शा और नामांतरण की स्थिति देख सकते हैं। सूचनार्थ नकल निःशुल्क है; ई-हस्ताक्षरित प्रमाणित कॉपी का शुल्क ₹10 से शुरू होता है।
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[ जमाबंदी नकल देखें → ] → https://apnakhata.rajasthan.gov.in/Owner_wise/VillSelAll3.aspx
[ नामांतरण स्थिति चेक करें → ] → https://apnakhata.rajasthan.gov.in/TrackMutationAvantan.aspx
[ भू-नक्शा देखें → ] → https://bhunaksha.rajasthan.gov.in/
[ नामांतरण आवेदन करें → ] → https://apnakhata.rajasthan.gov.in/publicApplication.aspx
Apna Khata क्या है और कौन चलाता है?
Body — 178 words
Apna Khata राजस्थान सरकार के राजस्व मण्डल का आधिकारिक भूमि-रिकॉर्ड पोर्टल है। इसका मुख्यालय टोडरमल मार्ग, अजमेर में है। पोर्टल की तकनीकी संचालन NIC (राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र) द्वारा किया जाता है।
यह पोर्टल केंद्र सरकार की DILRMP (Digital India Land Records Modernisation Programme) योजना के तहत चलता है। इसी वजह से पोर्टल को ई-धरती नाम से भी जाना जाता है — यह दोनों एक ही व्यवस्था के दो नाम हैं।
इसकी कानूनी नींव दो राज्य अधिनियमों पर टिकी है — Rajasthan Land Revenue Act, 1956 और Rajasthan Tenancy Act, 1955। जमाबंदी, खसरा, खतौनी और नामांतरण की पूरी प्रक्रिया इन्हीं क़ानूनों के तहत तय होती है।
अप्रैल 2023 में पोर्टल का पुराना पता apnakhata.raj.nic.in बदलकर नया पता apnakhata.rajasthan.gov.in कर दिया गया। पुराना लिंक अब खुद-ब-खुद नए पते पर redirect हो जाता है, इसलिए किसी भी तरह की जानकारी हमेशा नए पते से ही लें।
पहले जमाबंदी या खसरा देखने के लिए पटवारी या तहसील कार्यालय जाना पड़ता था। अब यही रिकॉर्ड मोबाइल या कंप्यूटर से सीधे देखे और डाउनलोड किए जा सकते हैं।
H2: पोर्टल पर कौन-कौन सी सेवाएँ मिलती हैं (और क्या-क्या नहीं)
Body — 248 words
Apna Khata पोर्टल पर जो काम होते हैं, उनकी साफ़ सूची नीचे दी है। साथ ही वे काम भी बताए हैं जो इसी पोर्टल पर नहीं होते — अक्सर लोग यहीं पर भ्रमित हो जाते हैं और गलत जगह खोजते रह जाते हैं।
पोर्टल पर क्या-क्या होता है
- जमाबंदी नकल — दोनों प्रकार, सूचनार्थ (निःशुल्क) और ई-हस्ताक्षरित (शुल्क सहित)
- खसरा, खतौनी और Record of Rights (RoR) विवरण
- भू-नक्शा देखना और डाउनलोड — यह सुविधा अलग पोर्टल bhunaksha.rajasthan.gov.in पर उपलब्ध है
- नामांतरण (Mutation) का आवेदन, उसकी स्थिति और P21 प्रतिलिपि
- सहमति विभाजन के लिए ऑनलाइन आवेदन
- सीमाज्ञान (Demarcation) आवेदन और उसकी प्रतिक्रिया
- गिरदावरी विवरण — रबी, खरीफ और ज़ायद तीनों फसल-चक्रों का
- गैर-प्रतिबंधित राजकीय भूमि का जिला-वार विवरण
- खाता संख्या, खसरा संख्या, मालिक के नाम, USN या GRN से खोज
पोर्टल पर क्या नहीं होता (यह जानना ज़रूरी है)
- कोई सामान्य नागरिक लॉगिन नहीं है। केवल दो तरह के लॉगिन हैं — ई-मित्र ऑपरेटर के लिए और राजस्व अधिकारी के लिए। आम नागरिक बिना लॉगिन ही रिकॉर्ड देख सकता है।
- रजिस्ट्री या Sale Deed यहाँ नहीं मिलती। इसके लिए Sub-Registrar Office (SRO) जाना होगा।
- DLC रेट (सरकारी दर) यहाँ नहीं है — यह IGRS Rajasthan (
epanjiyan.rajasthan.gov.in) पर है। - Encumbrance Certificate (भार-मुक्त प्रमाण पत्र) यहाँ जारी नहीं होता — यह SRO से अलग प्रक्रिया से मिलता है।
- पट्टा (Urban या Abadi) Apna Khata पर उपलब्ध नहीं है — यह UIT या संबंधित नगर निकाय जारी करता है।
H2: जमाबंदी नकल कैसे निकालें (वेरिफाइड स्टेप्स)
Body — 352 words
जमाबंदी नकल जमीन के मालिकाना हक़ का आधिकारिक दस्तावेज़ है, जिसे Record of Rights (RoR) भी कहते हैं। इसमें मालिक का नाम, खाता, खसरा, रकबा और खेती का विवरण लिखा होता है। इसे Apna Khata पोर्टल से मुफ्त देखा जा सकता है; ई-हस्ताक्षरित प्रमाणित कॉपी के लिए ₹10 से शुल्क लगता है।
दो तरह की नकल मिलती है — सूचनार्थ (information-only, निःशुल्क) और ई-हस्ताक्षरित (e-signed, क़ानूनी रूप से मान्य, शुल्क सहित)। बैंक लोन, कोर्ट केस, रजिस्ट्री से पहले verification और सरकारी सब्सिडी के लिए ई-हस्ताक्षरित नकल ही चाहिए होती है।
नकल निकालने के स्टेप्स
- ब्राउज़र में apnakhata.rajasthan.gov.in खोलें।
- होमपेज पर राजस्थान का नक्शा या ड्रॉपडाउन दिखेगा — इसमें से अपना जिला चुनें।
- अगले पेज पर अपनी तहसील चुनें।
- तहसील के तहत आने वाले सभी गाँवों की सूची में से अपना गाँव चुनें।
- अब दो विकल्प आते हैं — “जमाबंदी की प्रतिलिपि” और “नामांतरण की प्रतिलिपि”। जमाबंदी चुनें।
- खोज का आधार चुनें — खाता संख्या, खसरा संख्या, नाम से, USN या GRN।
- चुने गए विकल्प के अनुसार विवरण भरें और “चयन करें” बटन दबाएँ।
- अब दो विकल्प दिखेंगे — “नकल सूचनार्थ” (मुफ्त) और “ई-हस्ताक्षरित नकल” (शुल्क सहित)। अपनी ज़रूरत के हिसाब से चुनें।
- PDF स्क्रीन पर खुलेगी — “डाउनलोड” या “प्रिंट” आइकन से सेव करें।
ज़रूरी बातें जो पहले जान लें
सूचनार्थ नकल कोर्ट, बैंक लोन, रजिस्ट्री या किसी भी सरकारी काम में मान्य नहीं है। केवल अपनी जानकारी के लिए है।
किस काम में कौन-सी नकल
- सूचनार्थ — खुद के रिकॉर्ड की जाँच, पड़ोसी प्लॉट की प्राथमिक जानकारी
- ई-हस्ताक्षरित — बैंक लोन, कोर्ट केस, रजिस्ट्री से पहले ownership verification, सरकारी सब्सिडी आवेदन
ई-हस्ताक्षरित नकल का शुल्क
- पहले 10 खसरा तक: ₹10
- उसके बाद प्रति 10 खसरा (या उसका अंश): ₹5 अतिरिक्त
- Payment पोर्टल पर ही UPI, Net Banking या Debit Card से होता है।
H2: खसरा और खतौनी में क्या फर्क है (और किस नंबर से क्या मिलता है)
Body — 202 words
ज़मीन के रिकॉर्ड में तीन शब्द लगातार आते हैं — खसरा, खतौनी और जमाबंदी। इन्हें अक्सर एक-दूसरे के बदले इस्तेमाल कर दिया जाता है, जबकि तीनों अलग चीज़ें हैं।
- खसरा = ज़मीन के एक विशिष्ट टुकड़े (प्लॉट) का नंबर। एक गाँव में हज़ारों खसरे होते हैं। नक्शे पर हर खसरे की अपनी सीमा और नंबर होता है।
- खतौनी = एक खातेदार (ज़मीन का मालिक/काश्तकार) के अधीन आने वाले सभी खसरों की सूची। एक खातेदार के नाम पर जो भी ज़मीन है, उसकी पूरी जानकारी खाता संख्या के तहत एक खतौनी में आती है।
- जमाबंदी = पूरे गाँव की सभी खातौनियों का एक संकलित दस्तावेज़। यह गाँव का पूरा ज़मीनी रिकॉर्ड है।
Apna Khata पोर्टल पर खोज के समय तीन अलग नंबर काम आते हैं:
- खाता नंबर से — उस खातेदार के नाम पर आने वाली सारी ज़मीन एक साथ दिखती है।
- खसरा नंबर से — केवल वही एक विशिष्ट प्लॉट दिखता है।
- जमाबंदी नंबर — पूरे गाँव के रिकॉर्ड सेट का reference नंबर।
दो technical नंबर और हैं जो कम लोग जानते हैं — USN (Unique Serial Number) और GRN (Geographical Reference Number)। ये पोर्टल द्वारा हर खसरे को दिए गए digital identifiers हैं। अगर खाता या खसरा नंबर याद नहीं है, तो पुरानी नकल पर छपा USN/GRN डालकर भी रिकॉर्ड मिल जाता है।
H2: भू-नक्शा (Land Map) कैसे देखें
Body — 252 words
ज़रूरी स्पष्टीकरण: भू-नक्शा Apna Khata पोर्टल पर सीधे नहीं मिलता। इसके लिए अलग पोर्टल है — bhunaksha.rajasthan.gov.in। Apna Khata और Bhu Naksha, दोनों राजस्व मण्डल के तहत चलते हैं, लेकिन तकनीकी रूप से ये दो अलग सिस्टम हैं।
भू-नक्शा देखने के स्टेप्स
- ब्राउज़र में bhunaksha.rajasthan.gov.in खोलें।
- ऊपर दिए गए ड्रॉपडाउन में एक-एक करके भरें — District, Tehsil, RI (राजस्व निरीक्षक), Halka (पटवार हल्का), Village, और Sheet No.।
- चुनी गई शीट का नक्शा स्क्रीन पर खुलेगा। अपना खसरा सीधे नक्शे पर क्लिक करके चुनें, या ऊपर सर्च बॉक्स में खसरा नंबर भरकर खोजें।
- चुने गए खसरे की जानकारी — मालिक का नाम, रकबा, खाता संख्या — बाईं तरफ के पैनल में दिखेगी।
- उसी पैनल में “Nakal” बटन पर क्लिक करें।
- एक नया टैब खुलेगा — वहाँ “Show Report PDF” पर क्लिक करें।
- PDF खुल जाएगी — ऊपर दिए Download या Print आइकन से सेव करें।
कॉपी का शुल्क
प्रमाणित भू-नक्शा कॉपी के लिए प्रति 10 खसरा (या उसके अंश) ₹20। Payment उसी पोर्टल पर online होता है।
अगर आपका गाँव या खसरा न दिखे
राजस्थान के कुछ जिलों में पुराने कैडेस्ट्रल नक्शे अभी डिजिटाइज़ेशन की प्रक्रिया में हैं — ख़ासकर 2000 से पहले के कुछ ग्रामीण रिकॉर्ड। अगर आपके गाँव का नक्शा पोर्टल पर नहीं दिख रहा, तो इसका सबसे सामान्य कारण यही है। ऐसे मामले में संबंधित तहसील के भू-अभिलेख कार्यालय से physical copy ली जा सकती है।
एक बात ध्यान रखें
ऑनलाइन भू-नक्शा केवल दिशा और बाउंड्री का reference देता है। ज़मीन की सटीक सीमा तय करने के लिए सीमाज्ञान (Demarcation) की प्रक्रिया अलग से करवानी होती है, जिसमें पटवारी field visit करता है।
H2: नामांतरण (Mutation / दाखिल-खारिज) कैसे करें
Body — 398 words
नामांतरण राजस्व रिकॉर्ड में ज़मीन के मालिक का नाम बदलने की प्रक्रिया है। इसे Mutation कहा जाता है, और UP–Bihar से आए लोग इसी को दाखिल-खारिज के नाम से जानते हैं। Rajasthan Land Revenue Act, 1956 के तहत यह प्रक्रिया तय है।
नामांतरण कब करवाना पड़ता है
- बिक्री (Sale) — रजिस्ट्री होने के बाद नाम रिकॉर्ड में चढ़वाने के लिए
- वारिस / विरासत (Inheritance) — मालिक की मृत्यु के बाद वारिसों के नाम पर
- वसीयत (Will) — वसीयत के आधार पर
- हक त्याग (Relinquishment) — कोई सह-खातेदार अपना हिस्सा छोड़ दे
- दान (Gift) — Gift Deed के आधार पर
- कोर्ट आदेश — किसी भी अदालती निर्णय के बाद
ज़रूरी दस्तावेज़
- रजिस्ट्री / Sale Deed की कॉपी (बिक्री के केस में)
- मृत्यु प्रमाण पत्र (वारिस के केस में)
- वसीयत या हलफनामा (जहाँ लागू हो)
- सभी पक्षों का आधार कार्ड
- पुरानी जमाबंदी नकल
- आवेदक का पता प्रमाण
File specifications (यह detail बहुत कम जगह मिलती है, इसलिए पहले जान लें): सभी दस्तावेज़ एक PDF में merge करके upload करने होते हैं। प्रति पेज size 150 KB से कम रखें, वरना upload reject होगा।
Fee: ₹20 प्रति आवेदन, online payment (UPI / Net Banking / Debit Card)।
आवेदन के स्टेप्स
- apnakhata.rajasthan.gov.in खोलें।
- होमपेज पर “नामांतरण के लिए आवेदन करें” विकल्प पर क्लिक करें।
- आवेदन का प्रकार चुनें — बिक्री / वारिस / वसीयत / हक त्याग / दान / कोर्ट आदेश में से कोई एक।
- जिला, तहसील और गाँव चुनें।
- खोज का आधार चुनें — खाता संख्या या खसरा संख्या।
- पुराना मालिक और नया मालिक का विवरण भरें। आवेदक का मोबाइल नंबर डालकर OTP से verify करें।
- सभी दस्तावेज़ एक PDF में अपलोड करें और ₹20 का online payment पूरा करें।
- प्रक्रिया पूरी होने पर टोकन नंबर मिलेगा — इसे सुरक्षित रखें। आगे की पूरी status tracking इसी से होगी।
कितना समय लगता है (honest timeline)
- सामान्य बिक्री का केस — आमतौर पर 30 से 90 दिन
- विरासत, वसीयत या विवाद वाले केस — अधिक समय लग सकता है
- कोई fix guarantee नहीं दी जा सकती — यह पटवारी की field verification और तहसीलदार के approval पर निर्भर करता है
Sale Deed की रजिस्ट्री Sub-Registrar Office (SRO) में होती है; उसके बाद ही नामांतरण का आवेदन Apna Khata पर करना होता है। दोनों अलग प्रक्रियाएँ हैं, और एक के बिना दूसरी पूरी नहीं होती।
H2: आवेदन की स्थिति और टोकन नंबर कैसे ट्रैक करें
Body — 150 words
नामांतरण, सीमाज्ञान या सहमति विभाजन — किसी भी आवेदन की स्थिति पोर्टल पर “आवेदन की वर्तमान स्थिति” विकल्प से देखी जा सकती है। इसके लिए टोकन नंबर ज़रूरी है, जो आवेदन submit करते ही मिलता है।
स्टेटस के पाँच आधिकारिक स्तर
- प्राप्त (Received) — आवेदन पोर्टल को मिल गया है
- जाँच अधीन (Under Process) — पटवारी / Record Officer verification कर रहे हैं
- स्वीकृत (Approved) — तहसीलदार ने अनुमोदन दे दिया है
- अस्वीकृत (Rejected) — कारण के साथ reject
- दस्तावेज़ की कमी — कोई document incomplete या अस्पष्ट है
अगर टोकन नंबर खो जाए
Online retrieval का विकल्प पोर्टल पर नहीं है। संबंधित तहसील कार्यालय जाकर आवेदक के नाम, मोबाइल नंबर और approximate आवेदन तारीख़ से रिकॉर्ड निकलवाना पड़ता है।
अगर आवेदन अस्वीकृत हो जाए
Status में दिया गया कारण ध्यान से पढ़ें। दस्तावेज़ correct करके दोबारा आवेदन किया जा सकता है, या तहसीलदार के पास appeal फाइल की जा सकती है।
H2: सहमति विभाजन (Consent Partition) कैसे करें
Body — 118 words
सहमति विभाजन का मतलब है — एक संयुक्त खाते की ज़मीन को सभी सह-खातेदारों की सहमति से बाँटना। यह process केवल तभी संभव है जब सभी पक्ष सहमत हों; विवाद की स्थिति में मामला तहसील या सिविल कोर्ट में जाता है।
अतिरिक्त दस्तावेज़ (सामान्य से अलग)
- सहमति इकरारनामा — सभी सह-खातेदारों के हस्ताक्षर के साथ
- नज़री नक्शा — प्रस्तावित विभाजन की markings के साथ
- सभी सह-खातेदारों की आधार और पहचान कॉपी
- पुरानी जमाबंदी नकल
File spec वही — एक PDF, प्रति पेज 150 KB से कम।
प्रक्रिया संक्षेप में
पोर्टल पर “सहमति विभाजन के लिए आवेदन” → जिला, तहसील, गाँव चुनें → खाता / खसरा चुनें → सभी सह-खातेदारों की जानकारी भरें → दस्तावेज़ upload → submit → टोकन नंबर नोट करें।
H2: सीमाज्ञान / सीमांकन (Demarcation) के लिए आवेदन और प्रतिक्रिया
Body — 152 words
सीमाज्ञान (Demarcation) ज़मीन की सीमाओं को field में सत्यापित करने और boundary stones (पत्थर) गाड़कर measurement तय करने की प्रक्रिया है।
कब ज़रूरी है
- पड़ोसी से boundary dispute
- किसी के कब्ज़े का दावा
- बाड़ या दीवार लगाने से पहले
- बिक्री से पहले सही क्षेत्रफल confirm करने के लिए
आवेदन की प्रक्रिया
पोर्टल पर “सीमाज्ञान हेतु आवेदन” → जिला, तहसील, पटवार क्षेत्र चुनें → खाता संख्या पता हो तो “हाँ” चुनें, नहीं तो विवरण भरें → जिस खसरे का सीमांकन करवाना है उसे चुनें (एक से अधिक चुन सकते हैं) → फसल खड़ी है या नहीं बताएँ → आवेदक का विवरण और mobile → submit।
Field process
आवेदन मंज़ूर होने पर पटवारी तय तारीख़ पर field visit करता है, नाप करता है और boundary stones गड़वाता है। उसकी report पोर्टल पर “सीमाज्ञान प्रतिक्रिया” option में दिखती है।
ध्यान रखें
ऑनलाइन भू-नक्शा केवल reference है। क़ानूनी रूप से मान्य सीमा सीमाज्ञान report से ही तय होती है।
H2: गिरदावरी विवरण कैसे देखें (किसानों के लिए)
Body — 200 words
गिरदावरी पटवारी द्वारा साल में दो बार की जाने वाली फसल inspection है। इसमें खेत पर बोई गई फसल का प्रकार, बोया गया क्षेत्रफल, और मौसम रिकॉर्ड किया जाता है। यही रिकॉर्ड आगे बैंक लोन, फसल बीमा दावे और विभिन्न सरकारी scheme के eligibility proof के रूप में काम आता है।
तीन फसल-चक्र (seasons)
- रबी — अक्टूबर से मार्च (गेहूँ, सरसों, चना, जौ)
- खरीफ — जून/जुलाई से अक्टूबर (बाजरा, ज्वार, मूँग, कपास, मक्का)
- ज़ायद — मार्च से जून (गर्मी की छोटी फसलें — तरबूज़, खीरा, सब्ज़ियाँ)
तारीख़ें क्षेत्र और मौसम के अनुसार थोड़ी बदलती हैं।
पोर्टल पर गिरदावरी देखने के स्टेप्स
- पोर्टल पर “गिरदावरी विवरण” विकल्प पर जाएँ।
- वर्ष चुनें।
- फसल-चक्र चुनें — रबी / खरीफ / ज़ायद।
- जिला → तहसील → गाँव।
- खोज का आधार — खाता संख्या, खसरा संख्या, मालिक का नाम, USN या GRN।
- संबंधित खसरा चुनें — फसल का प्रकार, क्षेत्रफल और पटवारी द्वारा दर्ज विवरण स्क्रीन पर आ जाएगा।
- PDF download या print कर सकते हैं।
अगर गिरदावरी में गलती हो
पटवारी को written application दें — correct फसल का विवरण और proof (जैसे बीज की रसीद, बिजली bill, पड़ोसियों का statement) attach करें। अगर पटवारी स्तर पर सुनवाई न हो, तो तहसीलदार के पास escalation का विकल्प है।
H2: Apna Khata की फीस — क्या मुफ्त है, क्या नहीं
Body — 198 words
पोर्टल पर अधिकांश viewing और information sebayen निःशुल्क हैं। केवल certified या प्रमाणित कॉपियों पर शुल्क लगता है।
मुफ्त (Free)
- जमाबंदी नकल देखना — सूचनार्थ
- खसरा और खतौनी विवरण देखना
- भू-नक्शा देखना (bhunaksha.rajasthan.gov.in पर)
- किसी भी आवेदन की स्थिति ट्रैक करना
- गिरदावरी विवरण देखना
- गैर-प्रतिबंधित राजकीय भूमि का विवरण
शुल्क सहित (Paid)
| सेवा | शुल्क |
|---|---|
| ई-हस्ताक्षरित जमाबंदी नकल | पहले 10 खसरा तक ₹10 + प्रति अतिरिक्त 10 खसरा (या अंश) ₹5 |
| नामांतरण आवेदन | ₹20 प्रति आवेदन |
| भू-नक्शा प्रमाणित कॉपी | ₹20 प्रति 10 खसरा (या अंश) |
| P21 (नामांतरण प्रतिलिपि) | ₹20 |
Payment के तरीके
सभी online payment पोर्टल पर ही होते हैं — UPI, Net Banking, या Debit Card से। पोर्टल पर सीधे पैसे भेजने का कोई दूसरा तरीका नहीं है; बाहर का कोई agent आपसे extra charge माँगे तो वह official नहीं है।
ध्यान देने योग्य दो बातें
सूचनार्थ नकल कोर्ट या बैंक लोन में मान्य नहीं है — इसलिए वहाँ ई-हस्ताक्षरित नकल ही लें।
ई-मित्र kiosk से भी यही सेवाएँ मिलती हैं, लेकिन kiosk ऑपरेटर ₹30–₹50 तक अतिरिक्त service charge लेते हैं — यह उनकी सेवा का शुल्क है, सरकारी fee नहीं।
H2: Apna Khata Mobile App — असली कौन सा है?
Body — 182 words
Google Play पर आधिकारिक app का नाम: ApnaKhata Package ID: com.nic.apnakhata Developer: NIC (National Informatics Centre)
यही असली app है। NIC भारत सरकार की तकनीकी agency है जो पोर्टल का technical backend भी चलाती है।
App पर क्या-क्या उपलब्ध है
- जमाबंदी नकल (Khata / Khasra / Name-wise)
- नामांतरण आवेदन और status tracking
- भू-नक्शा integration (Bhunaksha)
- सीमाज्ञान process
- गिरदावरी विवरण
Web portal जैसा ही flow है — अलग से कोई registration ज़रूरी नहीं।
ज़रूरी चेतावनी — Play Store पर fake apps
“Apna Khata” नाम से कई third-party apps listed हैं — उदाहरण के तौर पर MG Apps Solution, Synoriq, और कई अन्य developers के apps। Play Store पर ये सब अपने disclaimer में साफ़ लिखते हैं कि वे सरकार से affiliated नहीं हैं।
Install करने से पहले दो चीज़ें check करें:
- Developer के नाम में NIC या National Informatics Centre लिखा हो।
- Package ID
com.nic.apnakhataहो।
बाकी सब third-party apps हैं — कुछ सिर्फ WebView में सरकारी साइट खोलते हैं।
iOS users
Apple App Store पर NIC का कोई official Apna Khata app मौजूद नहीं है। iPhone पर काम के लिए browser से apnakhata.rajasthan.gov.in खोलें।
H2: “Login” की उलझन — क्या citizen लॉगिन है?
Body — 198 words
सीधा जवाब पहले — आम नागरिक के लिए कोई अलग login नहीं है। जमाबंदी, खसरा, खतौनी, भू-नक्शा, गिरदावरी — सब बिना login देख सकते हैं। आवेदन status check करने के लिए भी सिर्फ़ टोकन नंबर चाहिए, login नहीं।
पोर्टल पर दिखने वाले login options दो तरह के users के लिए हैं:
1. ई-मित्र login
यह केवल ई-मित्र kiosk operators के लिए है। Certified copy का payment collect करना, नामांतरण fee जमा करना, या नागरिकों की ओर से आवेदन submit करना — यह काम ई-मित्र operator अपनी SSO ID से करते हैं।
2. Revenue Officer login
यह पटवारी, तहसीलदार और अन्य revenue staff के लिए है। इससे वे verification, अनुमोदन, और रिकॉर्ड updation का काम करते हैं।
आम नागरिक को login कब चाहिए
लगभग कभी नहीं। अगर आप खुद ई-मित्र kiosk जाने के बजाय online fee भरना चाहें, तो यह e-Mitra SSO के through होता है:
- sso.rajasthan.gov.in पर SSO ID बनाएँ (यह Jan Aadhaar / आधार से linked होती है)।
- SSO dashboard से “e-Mitra” section में जाकर संबंधित payment या आवेदन करें।
भ्रम क्यों होता है
कई blogs पर लिखा है कि “login करके जमाबंदी देखें” — यह सीधे तौर पर ग़लत है। Login का रास्ता सिर्फ़ payment या operator-level काम के लिए है, रिकॉर्ड देखने के लिए नहीं।
H2: आम दिक्कतें और उनके असली समाधान
Body — 348 words
पोर्टल पर users को जो दिक्कतें बार-बार आती हैं, उनके असली कारण और practical solutions नीचे दिए हैं।
पोर्टल धीमा है या खुल नहीं रहा Peak hours — आमतौर पर सुबह 10–12 और शाम 4–6 — server load सबसे ज़्यादा रहता है। सुबह जल्दी या रात में try करें। Browser cache clear करें, या दूसरा browser (Chrome के बदले Firefox, या उल्टा) आज़माएँ। Mobile data पर भी check कर लें — कभी-कभी local ISP routing issue होता है।
OTP नहीं आ रहा कुछ telecom operators (Airtel और Jio में common) सरकारी shortcode SMS कभी-कभी block कर देते हैं। कम से कम 10 मिनट रुकें; न आए तो दूसरा mobile number try करें। एक ही नंबर पर बार-बार “Resend OTP” दबाने से नया OTP rate-limit में अटक सकता है।
मालिक का नाम गलत लिखा है पोर्टल से सीधे correction नहीं होता। पटवारी को written application दें जिसमें आधार, पुरानी जमाबंदी और सही नाम का proof लगा हो। Verification के बाद तहसीलदार के अनुमोदन से रिकॉर्ड update होता है।
टोकन नंबर खो गया Online retrieval का option नहीं है। संबंधित तहसील कार्यालय में आवेदक का नाम, मोबाइल और approximate आवेदन तारीख़ देकर रिकॉर्ड निकलवा सकते हैं।
नामांतरण आवेदन reject हो गया Rejection का कारण status screen पर लिखा रहता है। ज़्यादातर मामलों में दस्तावेज़ अधूरे हैं, स्कैन अस्पष्ट है, या signatures mismatch हैं। Corrections के साथ नया आवेदन करें; serious case में तहसीलदार से personal मिलकर स्थिति समझें।
गाँव की list में मेरा गाँव नहीं दिख रहा राजस्थान के कुछ क्षेत्रों में पुराने रिकॉर्ड की digitization अभी चल रही है। तहसील के भू-अभिलेख कार्यालय से confirm करें कि गाँव portal पर कब तक live होगा।
ई-हस्ताक्षरित कॉपी download नहीं हो रही Payment confirm हो चुका है तो घबराएँ नहीं। Payment receipt के token से “Download e-Signed Copy” section में जाकर retrieve करें। कभी-कभी e-sign process में 24 घंटे तक लग जाते हैं।
10 साल से अधिक पुरानी जमाबंदी नहीं मिल रही पुराने सारे रिकॉर्ड अभी digital नहीं हैं। तहसील के record room से physical copy की request डालनी होगी; शुल्क और समय वहीं तय होता है।
H2: ज़मीन खरीदने से पहले कौन-कौन से रिकॉर्ड check करें
Body — 222 words
Apna Khata की जमाबंदी अकेली verification नहीं है। सही due diligence के लिए छह अलग रिकॉर्ड देखने पड़ते हैं — तभी आप fraud और legal disputes से बचते हैं।
1. जमाबंदी नकल (ई-हस्ताक्षरित) मालिक का नाम, खसरा, रकबा और खेती का प्रकार — सब पोर्टल पर verify करें। ई-हस्ताक्षरित कॉपी ही क़ानूनी रूप से मान्य है।
2. भू-नक्शा bhunaksha.rajasthan.gov.in से खसरे का नक्शा निकालें और actual plot की boundary से match करें। अक्सर seller जो प्लॉट दिखाता है वो रिकॉर्ड से मेल नहीं खाता।
3. नामांतरण history पिछले कम से कम 30 साल की ownership chain देखें। बीच में कोई गायब link, unregistered transfer या दावेदार वारिस — यह सब यहीं पकड़ में आता है।
4. Encumbrance Certificate (EC) Sub-Registrar Office (SRO) से लें। EC बताता है कि ज़मीन पर कोई loan, mortgage, attachment या legal charge है या नहीं। Apna Khata से यह जानकारी नहीं मिलती।
5. DLC rate से market value cross-check IGRS Rajasthan (epanjiyan.rajasthan.gov.in) पर उस क्षेत्र का DLC (District Level Committee) rate check करें। Seller अगर बहुत कम या बहुत ज़्यादा माँग रहा है, तो यहीं पता चलेगा।
6. कोर्ट case history ecourts.gov.in पर seller का नाम और property details से search करें। लंबित मुक़दमा है तो title में जोखिम है।
एक व्यावहारिक सलाह
अगर deal का size बड़ा है, तो यह पूरा verification एक stamped local property lawyer से cross-करवाएँ। ₹5,000–₹10,000 की fees लाखों के नुकसान से बचा सकती है।
H2: Apna Khata Bihar और अन्य राज्य
Body — 136 words
“Apna Khata” नाम officially केवल राजस्थान के पोर्टल का है। दूसरे राज्यों में इसी तरह की सेवाएँ अलग नाम और अलग पोर्टल पर चलती हैं। अगर आप दूसरे राज्य से हैं, नीचे सही जगह देखें।
बिहार (Bihar Bhumi)
पोर्टल — biharbhumi.bihar.gov.in और land.bihar.gov.in। बिहार में Record of Rights को खतियान (Khatiyan) कहते हैं। जमाबंदी register भी यहीं से online मिलता है।
उत्तर प्रदेश (UP Bhulekh)
पोर्टल — upbhulekh.gov.in। UP में Record of Rights को खतौनी कहते हैं। खसरा-खतौनी की नकल यहीं से निकलती है।
ध्यान दें
इस guide का पूरा focus राजस्थान के Apna Khata पोर्टल पर है। बिहार या UP के रिकॉर्ड, fee structure, और documents इससे अलग हैं। वहाँ के users को अपने राज्य के अधिकारिक पोर्टल से ही सही जानकारी मिलेगी।
H2: Helpline और आधिकारिक संपर्क
Body — 82 words
पोर्टल, रिकॉर्ड या आवेदन से जुड़ी किसी भी समस्या के लिए:
- राजस्व मण्डल, अजमेर: 0145-2627620, 0145-2627023, 0145-2627024, 0145-2429232
- NIC helpdesk: 0141-2233725
- ई-मित्र support: 0141-2221424, 0141-2221425
- Email: bor-rj[at]nic[dot]in, lrc-rj[at]nic[dot]in
First preference तहसील स्तर पर हो — पटवारी या तहसीलदार से मिलने पर ज़्यादातर मुद्दे वहीं हल हो जाते हैं। Escalation तभी करें जब तहसील स्तर पर जवाब न मिले।
H2: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
Body — 432 words
1. Apna Khata Rajasthan क्या है और कौन चलाता है? Apna Khata राजस्थान के राजस्व मण्डल का आधिकारिक भूमि-रिकॉर्ड पोर्टल है, जिसका technical संचालन NIC करता है। यह केंद्र सरकार की DILRMP योजना के तहत चलता है।
2. Apna Khata की आधिकारिक वेबसाइट क्या है? सही पता apnakhata.rajasthan.gov.in है। पुराना पता apnakhata.raj.nic.in अप्रैल 2023 में इसी नए पते पर redirect कर दिया गया था।
3. क्या Apna Khata पर citizen login करना ज़रूरी है? नहीं। जमाबंदी, खसरा, खतौनी, भू-नक्शा और आवेदन status — सब बिना login देखे जा सकते हैं। पोर्टल पर मौजूद login केवल ई-मित्र operators और Revenue Officers के लिए है।
4. जमाबंदी नकल कितने में मिलती है? सूचनार्थ नकल निःशुल्क है। ई-हस्ताक्षरित प्रमाणित कॉपी का शुल्क पहले 10 खसरा तक ₹10 है, और उसके बाद प्रति 10 खसरा (या अंश) ₹5 अतिरिक्त।
5. सूचनार्थ नकल और ई-हस्ताक्षरित नकल में क्या अंतर है? सूचनार्थ नकल केवल अपनी जानकारी के लिए है और क़ानूनी रूप से मान्य नहीं है। ई-हस्ताक्षरित नकल digitally signed होती है और बैंक लोन, कोर्ट केस, रजिस्ट्री और सरकारी सब्सिडी के काम आती है।
6. क्या online जमाबंदी कोर्ट में और बैंक loan के लिए मान्य है? केवल ई-हस्ताक्षरित नकल मान्य है। सूचनार्थ कॉपी केवल preview है। Bank और अदालत दोनों digitally signed version ही स्वीकार करते हैं।
7. नामांतरण में कितना समय लगता है? सामान्य बिक्री के केस में 30–90 दिन लगते हैं। विरासत, वसीयत या विवाद वाले मामलों में अधिक समय लग सकता है, क्योंकि verification पटवारी और तहसीलदार के स्तर पर होती है।
8. भू-नक्शा Apna Khata पर क्यों नहीं दिखता? भू-नक्शा तकनीकी रूप से अलग पोर्टल bhunaksha.rajasthan.gov.in पर है। दोनों पोर्टल राजस्व मण्डल के तहत हैं, पर उनका backend और URL अलग है।
9. Apna Khata का official mobile app कौन सा है? Google Play पर NIC द्वारा published app का package ID com.nic.apnakhata है। बाकी “Apna Khata” नाम वाले apps third-party हैं और अपने disclaimer में साफ़ लिखते हैं कि वे सरकार से affiliated नहीं हैं। iOS पर कोई आधिकारिक app नहीं है।
10. Token number खो गया तो status कैसे check करें? Online retrieval का विकल्प नहीं है। संबंधित तहसील कार्यालय में आवेदक का नाम, mobile number और आवेदन की approximate तारीख़ देकर token नंबर दोबारा निकलवाना पड़ता है।
11. Apna Khata Bihar के लिए कौन सी वेबसाइट है? बिहार में “Apna Khata” नाम का पोर्टल नहीं है। वहाँ के भूमि रिकॉर्ड biharbhumi.bihar.gov.in और land.bihar.gov.in पर उपलब्ध हैं। वहाँ Record of Rights को खतियान कहते हैं।
12. पुरानी (10 साल से अधिक) जमाबंदी कैसे मिलेगी? सभी पुराने रिकॉर्ड अभी digitize नहीं हुए हैं। तहसील के record room में written request देकर physical copy ली जाती है। शुल्क और समय स्थानीय तहसील पर निर्भर करते हैं।